एक दुआ

…….सफर तू और मंज़िल भी तू ही,……

……..खोज तू और खज़ाना भी तू ही,……

……..वजह तू और मकसद भी तू ही,…….

……..बाहर तू और अंदर भी तू ही…….

……..मार्ग तू और लक्ष्य भी तू ही…….

……..प्रार्थना तू और वरदान भी तू ही……

………ज्योत तू और प्रकाश भी तू ही,…….

……..बून्द तू और सागर भी तू ही,……..

……..तू मैं और मैं भी तू ही…….

तिन खोया तिन पाया

जैसे,

आंधियों से टकरा के भी फूल अपनी खुशबू नहीं खोता,

नीले आकाश में बिखर के भी सितारा अपनी रौशनी नहीं खोता,

गहरे आसमान में हो के भी चंद्रमा अपनी शीतलता नहीं खोता,

कीचर में खिल के भी कमल अपनी शुद्धता नहीं खोता,

वैसे ही,

संसार में रह के भी हमें अपनी मूल दिव्यता को न ही भूलना चाहिए और न ही खोने देना चाहिए।

और ऐसे ही,

कठिन से कठिन और हर चुनौतिपूर्ण स्थिति में अपनी श्रद्धा और आस्था प्रभु पे अडिग बनाए रखनी चाहिए।

किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में व घोर से घोर अंधकार के साय में, हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए की, ईश्वर हमारी सहायता अवश्य करेंगे और कुप अंधेरों से होते हुए उज्जवल प्रकाश का मार्ग निसंदेह दिखाएंगे, इतना विश्वास हमें हमेशा बनाए रखना चाहिए।

शाश्वत मित्र

जब छिन जाए सब धन-दौलत और ऊंचे मकान,

मिट जाए जब हर झूठी शान और खोखले लगने लगें सभी मान-सम्मान,

हो जाए जब अपने-पराए की सच्ची पहचान,

छाया हो जब हर ओर घोर अंधकार और तेज़ तूफान,

चाहे कैसे ही क्यों न हो ज़िन्दगी के इम्तिहान,

तब बस एक बात का रखना इत्मिनान,

की कोई है जिसे है हर घड़ी हमारा ध्यान,

जो हर क्षण कर रहा है हमारी सहायता, सुरक्षा व नित कल्याण,

वह कोई अन्य नहीं, वे तो हैं हम सभी के परमपिता, हमारे अपने श्री भगवान।

सुहाना सफ़र

सब हँसे तो हम भी मुस्कुरा दिये, कभी ग़मगीन हुए तो हम भी साथ रो लिए, सभी के सुख-दुख सभी से साझा हो लिए।

जीवन पथ पर चलते-चलते पग में फूल खिले या शूल मिले, हम तो बस यूंही चलते चले।

जीवन ने जब जो रुख लिया हमने भी वही कर लिया चाहे कांटे मिले या कलियां, हँस कर हमने सभी को अपना लिया।

सफर में जब सांझ ढली तो मन के दीप रौशन कर लिए, जब सवेरा हुआ तो एक बार फिर कदम आगे बढ़ा लिए।

जीवन में चलता ही रहता है धूप-छांव का यह खेल, चलते-चलते हो ही गया है इस चक्र से अपना भी ताल-मेल।

जब जैसा तब वैसा, इस जीवन का तो सौंदर्य ही है आखिर कुछ ऐसा!

Contemplations…….

……..endings bear the fruits of new beginnings……

……..constant renewal is the key to a fulfilling survival……

……..Faith never fails…….

……..an inner journey leads to Destination Eternity…….

……..in life manifest the blessing of the Divine Essence……

सदाबहार

खुशियों की बौछार है, हँसी की फ़ुहार है,

या ग़मों का भण्डार है और आंसुओं का अम्बार है,

हमारा जीवन निर्भर करता है की कैसे हमारे विचार हैं,

हमारी सोच से ही बनता बिगड़ता हमारा संसार है।

इसीलिए, नकारात्मक ख्याल को हर बार देनी उसकी हार है,

और इसकी जगह सकारात्मक समझ की हमे लानी बहार है।

इससे जीवन में उर्जा और उत्साह का संचार रहता लगातार है,

और ज़िन्दगानी का सफर हर हाल में बन जाता खुशगवार है।

कहानी नई पुरानी

अपना-अपना हिस्सा है, अपना-अपना किस्सा है।

मेरी कहानी है तुझसे अनजानी, सबब तो है वही, लेकिन किसी के लबों की हँसी, तो किसी की आँखों का पानी।

हर एक के नसीब का और ही फसाना है, जो इस ज़िन्दगानी में उसी को निभाना है, कुछ खोना है तो कुछ पाना है।

तेरी तू जाने मेरी मैं, कुछ नया तो नहीं सुनना-सुनाना है, बस सबके साथ हँसते-मुस्कुराते यूं ही सफर में चलते चले जाना है।

सवाल तो अनेक है, हाँ मगर जवाब तो सिर्फ एक है, कुछ किस्मतो का खेल है, तो कुछ भाग्य का हेर-फेर है।

न इससे शिकायत न उससे गिला, यह तो है जन्मों पुराना कोई सिलसिला, जो जिसने बोया उसे है वही मिला।

अपना-अपना हिस्सा है, अपना-अपना किस्सा है।

अद्भुत शिल्प दिव्य शिल्पकार

सूरज की गर्मी, चन्द्रमा की नर्मी,

फूलों की छटा, बादलों की घटा,

तारों की टिम-टिम, वर्षा की रिम- झिम,

पत्तों की सरसराहट, पवन की सुगबुगाहट,

धरती की हरियाली, आकाश की नील और लाली,

किसने किया इन सब का निर्माण, संचार और डाले इनमें प्राण? हाँ सही की आपने पहचान, इनके तो कई हैं रूप और नाम, लेकिन हैं तो सभी के निर्माता एक ही भगवान।

विचार विशेष

चाहे परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों न हो,चाहे सारी दुनिया अपनी शत्रु ही क्यों न प्रतीत हो, हमे हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और न ही विचलित होना चाहिए और एकाग्रता से अपने लक्ष्य की ओर प्रतिबद्धता से बढ़ते चले जाना चाहिए। हमारे परम शुभचिंतक, परम मित्र व परम-पिता ईश्वर हर क्षण हमारे साथ हैं और हमारी सहायता व मार्ग-दर्शन प्रतिपल कर रहे हैं। यह एक अटल सत्य है और इसे हमे विकट से विकट स्थिति में भी कभी नहीं भूलना चाहिए।

जीवन के आते-जाते उतार-चढ़ाव में अपना संतुलन बनाए रखना साधना का एक रूप है।

अपने मन, वचन और कर्म पर प्रत्येक क्षण ध्यान देना भी ध्यानाभ्यास का एक अंश है।

मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं, इन्सानियत से बढ़ कर कोई कर्म नहीं, यह भी एक प्रकार का ज्ञान है।

और एक बात, अपने विश्वास का दीपक जलाए रखें, चाहे अंधेरे कितने ही घनेरे क्यों न हो, प्रभु राह दिखाएंगे, बस कदम आगे बढ़ाए चलें, बेशक मंज़िल एक दिन ज़रूर ही पाएंगे, इतना एतबार बनाए रखें।

Reflections…….

Give more……and get more…….

Speak less…….and listen to the unspoken……

Keep yourself alert and aware……..and see the unseen in the mind’s eye……

Focus all energies on the task at hand……..big or small……and feel the not apparent, the not evident……

Always remember……the Almighty is with us all the time and everywhere……..this helps to experience the Present in its entirety……..without over involvement, fear or anxiety……..