सच्चा आध्यात्म

आध्यात्म के आवरण में, और आध्यात्मिक आचरण में अंतर है , जैसे, अंत और नया जन्म ।

इस अंतर को जानने के लिए आवश्यक है, ज्ञान का निरंतर अनुसरण ।

वस्त्र और वाक्य में ही नहीं, वरन, भाव में हो प्रभु का वर्णन।

हर विचार में, हर व्यवहार में, हो प्रभु के दर्शन ।

आध्यात्म नहीं कोई आज या कल का चलन, यह धर्म है, यह कर्म है और प्रभु पथ पर चलना है आजीवन, हर समय, हर क्षण।

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