अंतःकरण गुरुवचन

यात्रा होती है शुरू, जब मन ढूंढे कोई गुरु।

हैं गुरु कौन इस विषय पर सब हैं मौन।

किस पर करें विश्वास, कहीं टूट न जाए अपनी आस।

क्यों न ऐसा करें, अपने गुरु स्वयं बनें।

क्या है पाप और पुण्य में अंतर, इतना विवेक है हम सब के अंदर ।

धैर्य, संयम और समझ, सदा से ही है मनुष्य मे विद्यमान, जो है इश्वरिय वरदान।

यही दिव्य गुण करेंगे हमारा मार्गदर्शन, और यही बनेंगे हमारे गुरुजन ।

हम ही हैं शिक्षक हम ही हैं विद्यार्थी, इस गुरुकुल रूपी जीवन पथ के यात्री।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.