खुद से खुदा तक

हम अकेलेपन से क्यों डरते हैं ? सच तो यह है की हम कभी अकेले होते ही नहीं । हम हमेशा ही अपने साथ होते हैं । हम बस अपना खुद का सामना करना नहीं चाहते । हम अपने आप से डरते हैं । शायद इसकी वजह यह है की, हमारी खुद से पहचान नहीं है । हम अपने आप से अनजान हैं । जब हमारी खुद से पहचान हो जाएगी और हम अपने आप को जान जाएंगे तो यह डर ख़त्म हो जाएगा । कभी तन्हाई में अपने आप को समझने की कोशिश ज़रूर करनी चाहिए । मन में पड़ी गुत्थियां खोलनी चाहिए । मन में बसीं सभी उलझनें सुलझानी चाहिए । और यह मुमकिन है विचार मंथन से । सोचने से डरना नहीं है । सोच के सागर में डूब कर उसके पार निकलना है । इस सागर में गोते लगा कर हम सभी समस्याओं का समाधान तो ढूंढ ही लेंगे और साथ ही साथ अपने आप को जाने लेंगे पहचान लेंगे । सागर को पार कर उस किनारे पहुंच कर हमारी मुलाकात खुद से हो जाएगी । मन अब साफ और हल्का हो जाएगा । मन पर पड़ी धूल की परतें हट जाएंगी और अब हमारी रूह आइने की तरह चमक उठेगी । और अब इस आइने में हम खुदा के दीदार कर सकेंगे । और इसीके साथ हो जाएगा हमारा खुद से खुदा तक का सफर कामयाब ।

4 thoughts on “खुद से खुदा तक

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.