शक्तिमान

जब होगी हमारी आत्मा शक्तिशाली, तब बनेगा हमारा शरीर बलशाली ।

ज्यों -ज्यों हमारी आत्मा होगी परमात्मा में आश्वस्त, त्यों -त्यों हमारा शरीर भी होगा स्वस्थ ।

हमारी आत्मा है दीपक ज्योत, और परमात्मा हैं इसके अमर अखण्ड स्त्रोत ।

जब -जब होगा आत्म दीप और परमात्म ज्योत का मिलन, तब-तब होगा बलवान तन, और मन रहेगा सदा ही प्रसन्न ।

इस आत्मिक एकता से मिटेगा अंधकार और भस्म होंगे समस्त विकार।

और अगर कभी आ जाए कोई दुर्लभ परिस्थिति, तब मिलती है ओषधि को भी दोगुनी शक्ति, करने में रोग मुक्ती, जब होती है ऊंची अपनी आत्मिक स्थिति और मन में हो अथाह स्फूर्ति ।

बात है यह बहुत ही सीधी साधी, हर व्याधि हो जाएगी आधी, जब मनोबल होगा दृढ़, और आत्मबल अनादि ।

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