विचार से संसार

विचार ही होते हैं हमारे मन का आहार । और मन से ही बनता बिगड़ता है हमारा संसार।

जब हम करेंगे विचारों का आंकलन, तब ही तो आएगा जीवन में संतुलन ।

नाकारात्मक विचारों से मन होता है आहत और मन जब मान लेता है अपनी हार, तब फ़ल स्वरूप शरीर हो जाता है बिमार ।

तो क्यों न करें हम अपने विचारों को शुद्ध, खुद ही खुद?

जैसे ही मन में आए कोई भी नाकारात्मक संकल्प, वैसे ही चुने उसका साकारात्मक विकल्प ।

जब होगा मन तठस्त, तब ही तो होगा तन स्वस्थ ।

याद रखने की बात है, जब विचार होंगे पावन, तब मन में होगा आनंद, तन में होगा स्वास्थ्य का संचालन और सुख-समृद्धि से महकेगा यह जीवन रूपी आंगन।

विचारों की दिशा बदलना, यह काम नहीं आसान, मगर जब करेंगे हम अपनी इच्छा- शक्ति को बलवान, तब हो ही जाएगा इस आत्म निश्चय का सम्मान ।

प्रभु ज्ञान, ध्यान व स्तुति गान से भटका मन होगा शांत और स्वत: ही हो जाएगा शुभ विचारों का आह्वान ।

2 thoughts on “विचार से संसार

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