एक जागृत चयन

हमारे मन में ही रहते हैं दोनो देवता और दानव, यह हर एक पर निर्भर करता है की किसको चुनता है मानव ।

दोनो का है हम में ही वास, यह हमारा है चुनाव हम रहें किसके पास।

दानव है, काम, क्रोध, लोभ, मोह, एहंकार व अन्य सभी विनाशकारी विकार।

देवता हैं, प्रेम, त्याग, करुणा सहज स्वभाव व हर कार्य में निस्वार्थ और शुद्ध भाव।

संसार के समस्त जीव जंतुओं में ईश्वर ने केवल मनुष्य को दिया है विवेक का दिव्य उपहार, और अपनी इसी सूझबूझ व समझदारी से हम कर सकते हैं भवसागर पार।

और इस अद्भुत चयन शक्ति से हम करेंगे मन की दानव प्रवृति का दमन व आत्मा के दिव्य गुणों को नमन और अपने एक नए जीवन का सृजन।

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