शांति का उपवन

हमेशा इस बात का रखना ध्यान की मनुष्य तो है ब्रह्मांड में सिर्फ एक मेहमान, और प्रकृति ही रहेगी यहाँ अनंत विराजमान ।

अपने कर्मो का हिसाब-किताब बराबर करने आता ही रहेगा मानव बार-बार, मगर प्रकृति है काल और कर्म के पार।

मनुष्य हमेशा आता है यहाँ ले के नित नए स्वरूप, परंतु प्रकृति का अस्तित्व तो है शाश्वत व स्थिर क्योंकि प्रकृति तो है ईश्वर का ही प्रकट रूप ।

प्रकृति की है अपनी लय और गति, इसमें नहीं आती कभी कोई कमी या अति, यह तो मानव मन है जिसमे चलता ही रहता है कोहराम हर घड़ी ।

इसीलिए, जब कभी मन में मचा हो शोर, तो फ़िर बढ़ चल प्रकृति की ओर क्योंकि यहाँ बिखरा है आनंद और फ़ैली है शांति की किरने हर छोर।

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