शाश्वत मित्र

जब छिन जाए सब धन-दौलत और ऊंचे मकान,

मिट जाए जब हर झूठी शान और खोखले लगने लगें सभी मान-सम्मान,

हो जाए जब अपने-पराए की सच्ची पहचान,

छाया हो जब हर ओर घोर अंधकार और तेज़ तूफान,

चाहे कैसे ही क्यों न हो ज़िन्दगी के इम्तिहान,

तब बस एक बात का रखना इत्मिनान,

की कोई है जिसे है हर घड़ी हमारा ध्यान,

जो हर क्षण कर रहा है हमारी सहायता, सुरक्षा व नित कल्याण,

वह कोई अन्य नहीं, वे तो हैं हम सभी के परमपिता, हमारे अपने श्री भगवान।

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