कहानी नई पुरानी

अपना-अपना हिस्सा है, अपना-अपना किस्सा है।

मेरी कहानी है तुझसे अनजानी, सबब तो है वही, लेकिन किसी के लबों की हँसी, तो किसी की आँखों का पानी।

हर एक के नसीब का और ही फसाना है, जो इस ज़िन्दगानी में उसी को निभाना है, कुछ खोना है तो कुछ पाना है।

तेरी तू जाने मेरी मैं, कुछ नया तो नहीं सुनना-सुनाना है, बस सबके साथ हँसते-मुस्कुराते यूं ही सफर में चलते चले जाना है।

सवाल तो अनेक है, हाँ मगर जवाब तो सिर्फ एक है, कुछ किस्मतो का खेल है, तो कुछ भाग्य का हेर-फेर है।

न इससे शिकायत न उससे गिला, यह तो है जन्मों पुराना कोई सिलसिला, जो जिसने बोया उसे है वही मिला।

अपना-अपना हिस्सा है, अपना-अपना किस्सा है।

अद्भुत शिल्प दिव्य शिल्पकार

सूरज की गर्मी, चन्द्रमा की नर्मी,

फूलों की छटा, बादलों की घटा,

तारों की टिम-टिम, वर्षा की रिम- झिम,

पत्तों की सरसराहट, पवन की सुगबुगाहट,

धरती की हरियाली, आकाश की नील और लाली,

किसने किया इन सब का निर्माण, संचार और डाले इनमें प्राण? हाँ सही की आपने पहचान, इनके तो कई हैं रूप और नाम, लेकिन हैं तो सभी के निर्माता एक ही भगवान।

विचार विशेष

चाहे परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों न हो,चाहे सारी दुनिया अपनी शत्रु ही क्यों न प्रतीत हो, हमे हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और न ही विचलित होना चाहिए और एकाग्रता से अपने लक्ष्य की ओर प्रतिबद्धता से बढ़ते चले जाना चाहिए। हमारे परम शुभचिंतक, परम मित्र व परम-पिता ईश्वर हर क्षण हमारे साथ हैं और हमारी सहायता व मार्ग-दर्शन प्रतिपल कर रहे हैं। यह एक अटल सत्य है और इसे हमे विकट से विकट स्थिति में भी कभी नहीं भूलना चाहिए।

जीवन के आते-जाते उतार-चढ़ाव में अपना संतुलन बनाए रखना साधना का एक रूप है।

अपने मन, वचन और कर्म पर प्रत्येक क्षण ध्यान देना भी ध्यानाभ्यास का एक अंश है।

मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं, इन्सानियत से बढ़ कर कोई कर्म नहीं, यह भी एक प्रकार का ज्ञान है।

और एक बात, अपने विश्वास का दीपक जलाए रखें, चाहे अंधेरे कितने ही घनेरे क्यों न हो, प्रभु राह दिखाएंगे, बस कदम आगे बढ़ाए चलें, बेशक मंज़िल एक दिन ज़रूर ही पाएंगे, इतना एतबार बनाए रखें।

Reflections…….

Give more……and get more…….

Speak less…….and listen to the unspoken……

Keep yourself alert and aware……..and see the unseen in the mind’s eye……

Focus all energies on the task at hand……..big or small……and feel the not apparent, the not evident……

Always remember……the Almighty is with us all the time and everywhere……..this helps to experience the Present in its entirety……..without over involvement, fear or anxiety……..

तेरी शरण

आन पड़े हैं हम तेरी शरण, अब यहीं बीतेगा अपना सारा जीवन।

इतना है हमे यकीन की कितनी ही कठिन क्यों न हो परीक्षा, तू सदा ही करता है हमारी हर हाल में सुरक्षा।

अंधेरे कितने ही क्यों न हो सघन, तू जलाता है उजालों के दीप हर ओर हर क्षण।

रास्ते भले ही कितने भी क्यों न हो कंटीले और पत्थरीले, पग में तू हमारे बिछाता है नर्म, मुलायम फूलों के सिलसिले।

चाहे हो कड़कती धूप की किरन या हो अंधकार का घना छाया, सर पे हमारे सदा ही रहता है तेरी असीम कृपा का अटल साया।

इसीलिए, अब न है हमारे मन में कोई भी डर, भय या संशय, क्योंकि हमे है यह पता की हमेशा ही हमारे साथ है वे जो हैं अमर, अजय व अभय।

नए शिखर

…….टूटना पड़ता है, बनने के लिए……लड़खड़ाना पड़ता है, सम्भलने के लिए…….बिगड़ना पड़ता है, संवरने के लिए……..गिरना पड़ता है, उठने के लिए……..बिखरना पड़ता है, निखरने के लिए…… याद रखने की बात है…….की सोने को अग्नि में तपना पड़ता है कुन्दन बनने के लिए……इसीलिए……. जीवन में कभी रुकना नहीं…… थकना नहीं…… डरना नही…….निरंतर आगे बढ़ते ही रहना नित नए शिखर पहुँचने के लिए…….अपने लिए और अपने ईश्वर के लिए……

भूल भुलैय्या

सांझ ढले सूरज का बुझ कर सवेरे फिर निखरना,

चन्द्रमा का बादलों में छिप कर भी निकलना,

तारों के झुरमुट का विशाल आकाश में टिम- टिम कर रात्रि भर चमकना,

पवन का कभी मंद तो कभी तेज़ चलना,

नदिया का कभी दरिया बन तो कभी झरना बन बहना,

मिट्टी का हर आकार और रूप के सांचे में सहज ही ढलना,

खूशबू का एक समान चहुंओर सदा ही बिखरना,

अग्नि का हमेशा ही जल कर अंधेरों में उजाले भरना,

वसंत में रंग-बिरंगे फूलों का खिलना,

पतझर में छोटे-बड़े पत्तों का झड़ना,

सर्दीयों में सफेद बर्फ का गिरना,

गर्मियों में आग उगलते सूरज का चढ़ना,

वर्षा में बरसात का झिम-झिम कर बरसना,

यह सभी हमेशा अपने मूल रूप में रहते हैं व अपने मूल गुणों का निरंतर अनुसरण करते रहते हैं। तो फिर ऐसा क्यों हैं की, हम मनुष्य ही अपना मूल रूप व गुण भूल बैठे हैं? हमारी आत्मा, परमपिता परमात्मा का एक अंश है। इसका मूल रूप दिव्य है और सुख, शांति, आनंद व सन्तोष इसके स्वभाविक गुण हैं। संसार की भूल भुलैय्या में उलझ कर हमने अपना मूल सत्य कहीं खो दिया है, भुला दिया है। जब हम अपने मूल रूप की ओर लौटेंगे तो हमारे जीवन में सुख, शांति व सन्तोष की बहार छा जाएगी। अध्ययन, चिंतन, ज्ञानी जनों से मार्ग- दर्शन व हरी भजन से भटका मन और जीवन अपने सत्य रूप की ओर लौट जाएंगे। संसार की भूल भुलैय्या से निकल कर जब हम उस अनंत और आनंद के सागर तक पहुंचेंगे तो जीवन में प्रसन्नता और उत्साह की लहरों से हम सराबोर हो जाएंगे। इस दिव्य अनुभव की अनुभूति हम सभी को करने का प्रयास करना ही चाहिए, यह हमारा मूल कर्तव्य है।

A Few Thoughts…..

Go with the flow. Sometimes, it is better to be with the tide rather than to be against it, as one never knows it might take one along to hithero unexpected joy, surprise, unexplored breath taking sights to behold and provide many new lessons to learn.

Our inner and outer worlds should be in consonance with one another. Such a life is full of harmony and devoid of any form of conflicts and clashes.

Know your own self worth. Do not bother to prove anything to anyone. It is just not worth it because one can never please all, so it is better to please none at all!

Associate mostly with people who help to bring out the best in you and those who make you react negatively are best avoided.

Heed your inner calling. Try to listen to it and work upon realizing it in life and experience deep fulfillment and true enrichment.

And of course, never forget to be your own ‘happy’!

कश्ती के किनारे

तलाश अभी जारी है, सफर अभी बाकी है,

ईश्वर स्वयं इस जीवन न्य्या के माझी हैं,

प्रभु ही मझधार में हमारे खेवय्या और साथी हैं,

भरोसा है, कश्ती किनारे पहुंचेगी, हिम्मत न अभी हमने हारी है।

केंद्र बिंदू

इस विषय पर हम सभी को कभी-न-कभी अवश्य ही विचार करना चाहिए की हम कुछ भी करने से पहले यह अवश्य ही सोचते हैं की लोग क्या कहेंगे, दुनिया क्या कहेगी? लेकिन, क्या हमने कभी इस बात पर विचार किया है, की भगवान हमारे बारे में क्या कहेंगे या क्या सोचेंगे? हम हमेशा ही इन्सान की नज़रों में तो महान बनना चाहते हैं, लेकिन क्या हमें इस बात से कोई भी फर्क पड़ता है की हम ईश्वर की नज़रों में कहाँ हैं? जब हम प्रत्येक कार्य ईश्वर को ध्यान में रख कर करते हैं तो हमारा हर कार्य ही दिव्य बन जाता है। और हमारे पथ में आने वाली हर चुनौति का सामना करने का साहस और शक्ति भगवान हमे स्वयं ही प्रदान करते हैं। जब हम प्रभु को केन्द्र में रख कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं तो पाते हैं की भगवान हमेशा ही हमारे साथ होते हैं और उन के जैसा हमारा कोई अन्य मित्र, शुभचिंतक या अभिभावक नहीं। इसीलिए, कभी ईश्वर का ध्यान करके और उन्हीं को समर्पित करके कोई कार्य कर के देखिए और आप ही अनुभव करिए की कैसे कदम-कदम पर ईश्वर की कृपा और उनका सहारा हर क्षण हमारे संग हैं। लोक और लोगों के लिए जिया गया जीवन लौकिक है और भगवान और उनके लिए जिया गया जीवन अलौकिक है!