ख़ामोशी ज़ुबान होती है, जब प्रार्थना सच्चि होती है, लफ्ज़ों की न अब कोई भी ज़रूरत होती है, क्योंकि, बोल हैं सीप और प्रार्थना एक बेदाग मोती होती है।

ख़ामोशी खुद बोलती है, दर्द के राज़ खोलती है, अल्फाज़ों के बोझ अब न वह ओढ़ती है, प्रार्थना तो एक एहसास है, शब्दों को वह कहाँ तोलती है ।

No Worries

When the circumstances are not within one’s control then the best thing to do is to leave it all on the Almighty. Sometimes, letting go of power is most empowering. At times it is best to let God be the Doer. And as and when the time is right for us to take action then the Supreme Power will himself inspire us to act. Allow things and situations to take their own course. Sometimes, not doing anything is the biggest Doing. Trust in the Divine. When we let go and leave things unto the Almighty then the Almighty does the best unto us. Keep no doubts. Surrender unconditionally. Rest assured in the happy knowledge that your matters are being attended to by the best and most efficient and effective of all Powers that be. This makes us light and empty and gives us energy to heal from within and recalibrate without. Just relax! Start small. One step at a time. Apply this policy on matters of small proportion as an experiment to begin with . And then slowly increase the application on matters of larger magnitude. Go from small to medium to issues with lasting consequences and wide ranging ramifications. Cultivate this practice with patience, perseverance and unwavering faith. Keep going and glowing in the glory of the Divine Design.

Lifestyle, Mind Matters

Many of us are afflicted with issues related to lifestyle. The stress in the mind manifests itself in the body, and such ailments are known as lifestyle disorders, these are basically just a ‘condition’. And, we can avoid these by bringing around a change in our outlook towards life. Developing a new perspective will enable us to see life in a new light. These issues can be effectively addressed when we adopt a new approach on life and living, therby, revamping and creating a new lifestyle for ourselves.

Few major sources of inner distress is holding on to grudges, harbouring grievances and holding on to the past. These block the free flow of energies in the body, creates toxins in the system and various kinds of imbalances in the body. The solution to this is,’ Let go ‘, easier said than done, right! Nevertheless, it can be done. With time and perseverance this idea can be successfully developed into a practice. Attending spiritual discourses, regularly practicing yoga and meditation and relevant self study will help one realise the pettiness and futility of such negativity and help release the pent up emotions. It will instead with continued practice be replaced by a sense of acceptance, forgiveness, and finally letting go. There will be no more mental agitation and emotional restlessness left. A sense of fulfilment will slowly develop as one continues on the path of spiritual progress. Positivity and enthusiasm will now be our new corner stones by which we will live in the present.

Old patterns of thinking which are no longer relevant should be replaced by prevalent ideas which are insync with the present times. Old mindsets which do not serve any purpose any more has to be discarded as these clash with the prevailing concepts and cause friction amongst family, friends and make us feel alienated at large. This causes pent -up resentment in our minds and creates mental agony and stress, thereby causing lifestyle disorders. The only solution to this problem is to be mentally flexible and change with the changing times and ethos. Do not resist change. Accept the principle, that, constant evolution is the way of life. Do not hold on to glories of the past and match your steps with the pace of time. Abiding by these priniples there will neither be any blockages within nor any confrontation without. Now we will experience harmony and peace and consequently, allow ourselves to heal.

मन की वास्तु कला

जीवन में स्थाई सुख व शांति के लिए निम्नलिखित निर्देशों का पालन अवश्य करें –

मन के खिड़की व दरवाज़ों को हमेशा खुला रखें। यहाँ किसी भी प्रकार की दुर्गंध को न रहने दें। हमेशा ही ताज़ी हवा के निर्विघ्न प्रवाह से मन की स्थिति तरो- ताज़ी बनाए रखें। किसी भी तरह की नकारात्मक सोच को यहाँ प्रवेश न दें। साकारातमक सोच अपनाएँ । जीवन के प्रति एक उर्जावान दृष्टिकोण बनाएं । समस्याओं और कठिनाईयों को सुलझाने के लिए एक आशावादी नज़रिया रखें।

मन की ज़मीन की वक्त – वक्त से सफाई करते रहें। पुरानी जीवन शैलि छोड़कर नए तरीके व नई जीवन पद्धति अपनाएं। नए विचारों व आविष्कारों के विषय में निरंतर जागरूक रहें । नई विचारधाराओं को निरंकुश स्वीकारें । वक्त के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहें।

मन की दीवारों पर पड़ी पुरानी पुताई उतार कर इसे एक नया रंग रूप दें। यहाँ नई स्मृतियों का निर्माण करें। बीते पल को बीते कल में ही छोड़ दें। अपने व्यक्तित्व को निखारें। कोई नई कला सीखें या कोई नया हुनर आज़माएं।

मन की छत पर पड़े सभी बोझ उतार दें। नई उर्जा के संचालन के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है । पुराने लोग व पुराने रिश्ते जिससे आपको सिर्फ निराशा और हताशा ही मिलती है और जहाँ सुधार की कोई उम्मीद न हो, उसे जीवन से दर किनार कर दें। साझी सोच वाले लोगों से मेल जोल बढ़ाऐं। नए मित्र बनाएं जो आपके जीवन में खुशहाली लाऐं।

मन के किसी भी कोने में धूल न जमी रहने दें। मन का वातावरण शुद्ध व पवित्र बना रहे। प्रभु सुमिरन और ज्ञान विवेचन से मन की पवित्रता कायम रहती है और मन पर पड़ी सभी प्रकार की सांसारिक धूल हट जाती है और नई परतें जमने नहीं पाती।

विचार संग्रह

जब काबू हो जाएगा मन, तब सफल हो जाएगा जीवन ।

ज्ञान वह नहीं जो हम कहते हैं, ज्ञान वह है जो हम करते हैं।

ज्ञान का जब हर क्षण होगा पालन, तब ही होगा ज्ञान का जीवंत उदाहरण ।

पहले जानो और समझो क्या है ज्ञान, तब ही होगा मन शांत और निर्विघ्न होगा ध्यान ।

ध्यान सिर्फ़ वह नहीं जिसका हम करते हैं एकांत में अनुसरण, ध्यान वह भी है जो हम देते हैं अपने मन, वचन और कर्म पर हर घड़ी हर क्षण ।

आँखें होती हैं हमारी आत्मा का दर्पण, हम आँखें बंद करते हैं तो अपनी आत्मा के करते हैं दर्शन, और जब झांकते हैं दूसरों की आँखों में तब वहाँ झलकता है उनकी आत्मा का प्रतिबिंब कण – कण।

जैसा तन वैसा मन, जैसी प्रकृति वैसी प्रवृत्ति

जल – जैसे जल मिल जाता है हर रंग में और ढल जाता है किसी भी ढंग में, वैसे ही हमें भी होना है हर बदलती परिस्थिति के संग में।

अग्नि – जिस प्रकार अग्नि में जल के अशुद्धियों का होता है नाश, उसी तरह जीवन तप मे मनुष्य के समस्त विकारों का भी हो जाता है विनाश । अग्नि में तप के ही सोने में आता है प्रकाश।

वायु – कभी सुगंधित पवन तो कभी भयंकर आंधी, हवा तो किसी ने कभी नहीं बांधी। एसे ही निरंतर चलते रहना है जीवन की प्रकृति, चाहे जैसी भी हो इसकी रूप, रंग और आकृति ।

आकाश – विशाल और अंतहीन, चाहे दिन हो या रात, सूखा हो या बरसात, वैसे ही बना रहे हमारा धैर्य व विश्वास भले ही कोई भी हो बात और मन में रहे हर क्षण प्रभू की याद।

पृथ्वी – जैसे कभी बंजर तो कभी हरी भरी, वैसे ही जो भी हो परिस्थिति, चलता रहे निरंतर ज्ञान का आदान-प्रदान हर क्षण, हर घड़ी ।

विचार संग्रह

जहाँ तन वहाँ मन, फ़िर जीवन में उत्सव और आनंद हर क्षण ।

रास्ता वही और वही मंज़िल, तो जीवन सफर बनता है सुहावना और खुश दिल क्योंकि, जब नहीं होता कोई भटकाव, तब लहरों को मिल ही जाते हैं साहिल और रातों में भी जगमगाते हैं सितारें झिलमिल।

राग छेड़ने से पहले वीणा के सुर मिलाओ,और वाणी के तार छेड़ने से पहले, शब्दों, विचारों और उनके परिणामों का हिसाब लगाओ, नहीं तो, कर्कश होंगे राग और शब्द लगाएंगे आग।

जब होता है हर ओर अंधकार, तब जलते हैं चिरागों हज़ार जिनकी लौ में रौशन होते हैं यकीन और एतबार, और फ़िर इस प्रकाश में हो जाते हैं भक्त और भगवान् सदा के लिए एक सार।

खुशी की कुंजी

जो गुज़र गया वह है फसाना पुराना,

जो आएगा वह है किस्सा अनदेखा अनजाना,

जो आज है अभी है, वही है अपना जाना पहचाना ।

यह बात तो सब जानते हैं,

लेकिन कितने इसे मानते हैं ?

आज इस सत्य को स्वीकारते हैं, और इसी क्षण से, पूरी निष्ठा से इसे अपने जीवन में उतारते हैं।

Healthy and Happy

Heal the soul and the body will be healthy and whole.

We will experience sound sleep, when our conscience is light with no burdens and guilty secrets to keep.

At times when all seems dark and nothing is clear, then do not fear and always remember, God is near.

Our soul is lost and alone, we have to anchor it back unto the Divine, and it will be happy to be home.

सफल जीवन

मन को मिले ज्ञान, आत्मा में हो इश्वर का ध्यान, शरीर को मिले सात्विक खान-पान व व्यायाम, बुद्धि करे ऐसा काम जिससे हो स्वंय व सबका कल्याण और एक दूसरे का हो परस्पर सम्मान, यही है सफल जीवन की सच्ची पहचान ।